क्या आपको याद है, आपने एक कसम खाई थी

 

 

क्या आपको याद है, आपने एक कसम खाई थी? आपने यह शपथ एक बार नहीं बल्कि हजारों बार ली थी| आप स्कूल के दिनों में रोज भारत माँ की कसम खाकर कहते थे –

“भारत मेरा देश है।

समस्त भारतवासी मेरे भाई-बहन हैँ।

मैँ अपने देश से प्रेम करता हूँ।

इसकी समृद्ध एवं विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है।

मैँ सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूगाँ।

मैँ अपने माता-पिता, शिक्षकोँ एवं गुरुजनोँ का सम्मान करुगाँ और प्रत्येक के साथ विनीत रहूगाँ।

मैँ अपने देश और देशवासियोँ के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ।

इनके कल्याण एवं समृद्धि मेँ ही मेरा सुख निहित है।“

 

यह भारत माँ (Bharat Mata) की राष्ट्रीय प्रतिज्ञा (Rashtriya Pratigya) है| दोस्तों इस राष्ट्रीय प्रतिज्ञा ( Rashtriya Pratigya ) को हमने हजारों बार बोला है लेकिन हममें से ज्यादात्तर लोग ऐसे होंगे जिन्होंने स्कूल के बाद इसके बारे में वापस कभी सोचा तक नहीं होगा|

हम वह भारतीय है जो अग्नि के सात फेरे लेकर ली गई कसमों एंव विवाहरुपी पवित्र बन्धन को जीवन भर निभाते है, तो हम उस वादों को क्यों भूल गए है जो हमने भारत माँ से किये थे?

 

हम कहते तो है कि सभी भारतवासी हमारे भाई बहन है, लेकिन हममें से ज्यादात्तर लोग अपने उसी छोटे छोटे गरीब भाई-बहनों की भूख मिटाने के लिए, एक दिन भी पिज़्ज़ा  व बर्गर के बिना नहीं रह सकते!

 

हम कहते तो है की भारत की संस्कृति पर हमें गर्व है लेकिन उसी भारतीय संस्कृति को अपनाने में हमें शर्म आती है और मात्रभाषा बोलने से हमारा स्टैण्डर्ड गिरता है!

 

हम कहते तो है कि हम अपने माता पिता एंव गुरुजनों का सम्मान करेंगे लेकिन हममें से कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो अपने माता पिता की भावनाओं को समझ नहीं पाते|

 

हम कहते तो है कि हम अपने देश एंव देशवासियों के प्रति निष्ठा बनाये रखेंगे लेकिन हम वहीँ है जो सड़क पर उस व्यक्ति को देखकर भी अनदेखा कर देते है जो दुर्घटना में घायल हो गया है एंव मदद की गुहार कर रहा है!

 

हम कहते तो हो है कि हम देश का भला चाहते है लेकिन हम वही है जिसे लगता है कि देश की जिम्मेदारी केवल नेताओं की है एंव हमारी जिम्मेदारी केवल नेताओं एंव सिस्टम की आलोचना करना है|

 

हम कहते तो है कि भारत हमारी माँ है लेकिन हम आज तक यह साबित नहीं कर पाए कि हम भारत के पुत्र है|

 

दोस्तों हमें भारत माँ से किये गए वादे की अहमियत को समझना होगा| अगर हम थोड़े से भी सक्षम है तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने असक्षम भारतवासी भाई बहनों को सक्षम बनायें एंव इसके लिए जितनी हो सके उतनी मदद करें| मदद केवल आर्थिक रूप से नहीं होती, मदद किसी भी तरह से की जा सकती है इसलिए हमें अपने दिमाग से इस बात को निकाल देना होगा कि मदद वही कर सकता है जो धनवान है| अगर आप किसी को सही रास्ता भी दिखाते है तो आप उसकी बहुत बड़ी मदद करते है|

दोस्तों हम सबने नए भारत के सपने संजोये है लेकिन हम अपनी ही जिंदगी में इतने उलझ जाते है कि धीरे धीरे वे सपने टूटने लगते है| दोस्तों इन सपनों को टूटने मत दो, देशप्रेम की चिंगारी जलाये रखो, समय आने पर यह चिंगारी अपने आप प्रचंड ज्वाला का रूप ले लेगी और गरीबी, भ्रष्टाचार एंव आतंकवाद जैसी समस्याओं को जला कर राख कर देगी|

इस देश के लिए जितनी जिम्मेदारी नेताओं की है उतनी जिम्मेदारी हमारी भी है और यह जिम्मेदारी केवल आलोचना करने से समाप्त नहीं हो जाती|

दोस्तों आइये इस गणतंत्र दिवस से हम अपने उस वादे को वापस याद करें एंव उसे पूरा करने के लिए हरसंभव कोशिश करें जिसे पूरा करने की हमने हजारों बार कसमें खाई थी क्योंकि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती|

 

जय हिन्द, जय भारत

Jai Hind Jai Bharat

4 thoughts on “क्या आपको याद है, आपने एक कसम खाई थी

  1. Sir,
    I want to serve my country and having many ideas, but how can i motivate people to get together and let us help others.

  2. I don’t know why didn’t people like this story.But I feel good to read it.Thank you very much for remind my vows.

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