Real Life Inspirational and Success Stories of Great People – महान लोगों की सफलता की कहानियां

कहानियां (Stories) हमें प्रेरित करती है और हर बात एक जिंदगी में मुसीबतों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है| आज हम कुछ ऐसे ही महान लोगों (Great People) के संघर्ष और सफलता की कहानियां संक्षिप्त में प्रकाशित कर रहे है| इन लोगों के सामने हजारों चुनौतियाँ और मुश्किलें आई, लेकिन इन्होंने कभी हार नहीं मानी| यह जिंदगी में हजारों बार गिरे, लेकिन हर बार गिरकर वापस उठ गए |

Real-Life Motivational Success Stories of Unsung Heros

Inspirational Story#1

दरिपल्ली रमैया – Daripalli Ramaiah:

दरिपल्ली रमैया एक सच्चे प्रकृतिप्रेमी है जिन्होंने अकेले दम पर एक करोड़ से भी ज्यादा पेड़ लगाकर यह साबित कर दिया कि अच्छे कार्य करने के लिए पैसे और संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती| रमैया जी तेलंगना राज्य के खम्मम जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले है। जलवायु में आ रहे बदलाव, प्रदूषण में बढ़ोतरी और वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से दरिपल्ली का मन हमेशा बेचैन रहता था और वे अपनी मातृभूमि के लिए कुछ करना चाहते थे। फिर क्या था वे रोज इसी इच्छाशक्ति के साथ जेब में बीज और साईकिल पर पौधे रखकर जिले का लंबा सफर तय करते और जहां कही भी खाली भूमि दिखती वही पौधे लगा देते। आज इसी का परिणाम है कि उन्होंने अकेले दम पर एक करोड़ से भी ज्यादा पेड़ लगा दिए है| …………पढ़िए प्रकृतिप्रेमी दरिपल्ली रमैया की इच्छाशक्ति और सफलता पूरी कहानी

Inspirational Story#2

Nick Vujicic

Nick Vujicic एक ऐसे व्यक्ति है जिनके जन्म से ही हाथ पैर नहीं थे| वे Phocomelia नाम की एक दुर्लभ बीमारी के साथ पैदा हुए थे, जिसके कारण वे जन्म से ही अपंग थे| लेकिन उन्होंने जिंदगी से संघर्ष करके अपनी इस कमजोरी को हरा दिया| आज 33 वर्षीय Nick Vujicic न सिर्फ़ एक सफल प्रेरक वक्ता हैं, बल्कि निक  वह सब करते है जो एक सामान्य व्यक्ति भी नहीं कर पाता| जन्म से ही हाथ-पैर न होने के बावजूद आज वे फुटबाल व गोल्फ खेलतें है, तैरते हैं, स्काइडाइविंग और सर्फिंग भी करतें हैं। …………………पढ़िए Nick Vujicic के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी

Inspirational Story #3

श्रीकांत बोला – Shrikanth Bolla

यह कहानी है एक ऐसे व्यक्ति कि जो जन्म से ही नेत्रहीन है| जिसने इस दुनिया की नकारात्मक सोच से संघर्ष किया| जिसने अपने आप से संघर्ष किया, अपनी नेत्रहीनता से संघर्ष किया| और हर बार जीत उसी की हुई| उसके जन्म से नेत्र नहीं थे लेकिन फिर भी उसने अपने दम पर 50 करोड़ की एक ऐसे कंपनी खड़ी कर दी जो दिव्यांग लोगों को रोजगार प्रदान करती है ….. पढ़िए नेत्रहीन सीईओ श्रीकांत बोला के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी

Inspirational Story #4

स्टीफन हॉकिंग – Stephen Hawking

यह कहानी है विश्व के सबसे महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग की| 21 वर्ष की उम्र में स्टीफन हाकिंग को Amyotrophic Lateral Sclerosis (ALS) नामक बीमारी हो गयी| इस बीमारी से शरीर के सारे अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते है और आखिर में मरीज की म्रत्यु हो जाती है।उस समय, डॉक्टरों ने कहा था कि स्टीफन हॉकिंग दो वर्ष से अधिक नहीं जी पाएंगे और उनकी जल्द ही मृत्यु हो जाएगी|

लेकिन स्टेफन हाकिंग ने मौत को मात दे दी| स्टीफन का शरीर धीरे-धीरे जिन्दा लाश बन गया लेकिन उन्होंने अपना कार्य जारी रखा| आज वे 74 वर्ष की उम्र में भी यात्राएं करते है, सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेते है और निरंतर अपने शोध कार्य में लगे हुए है। …………………………… पढ़िए स्टेफन हाकिंग के संघर्ष और इच्छाशक्ति की पूरी कहानी

A Kumar :ए. कुमार राजस्थान से हैं और वे सामान्य तौर पर खेल, विज्ञान, करियर के बारे में लिखते हैं| उनसे hindihappy@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता हैं

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  • Aapke blog ka regular reader hu....teeno kahani behtareen hain......ek baar aur read kar li......

  • अफ़सोस आपकी Happy Hindi नामक साइट पर सब कुछ अंग्रेजी में है.

    • हमें पता है कि कुछ लोगों को लगता हैं कि हम हिंदी की वेबसाइट पर अंग्रेजी शब्दों का उपयोग करते हैं और वे सही भी हैं लेकिन इसके कुछ कारण हैं जिन्हें हर किसी को समझना आवश्यक हैं -

      सबसे पहली बात तो यह कि अगर हम पूर्ण रूप से हिंदी का उपयोग करेंगे तो हम हिंदी को ही नुकसान पहुंचा देंगे क्योंकि अगर हम पूर्ण रूप से हिंदी का उपयोग करेंगे तो यह साईट लोगों तक पहुँच ही नहीं पाएगी क्योंकि 99% लोग इन्टरनेट पर अंग्रेजी में सर्च करते हैं| उदाहरण के लिए अगर किसी को हिंदी कहानियां पढनी हैं तो वे सर्च करेंगे - Hindi Stories. अब अगर हम पूर्ण रूप से हिंदी का उपयोग करें तो अगर आज इस साईट पर हर रोज जो 25000 लोग आते है उसमें से 1000 लोग भी नहीं आ पाएंगे| अगर इस साईट पर इतने लोग नहीं आते तो हम आज हिंदी में इतने सारे अच्छे लेख नहीं लिख पाते और इस तरह से हम हिंदी को ही नुकसान पहुंचाते|

      रही बात इस साईट पर अंग्रेजी शब्दों की तो वे केवल 5% प्रतिशत हैं|

      आज के इस युग में जहाँ 15 वर्ष के भारतीय बच्चे को अंग्रेजी में तो गिनती आती हैं लेकिन अगर हम उसे कहें कि हिंदी में 1 से सौ तक गिनती बोल के दिखाए तो वह बोल नहीं पायेगा| हम दूसरी भाषाओँ का विरोध करके हिंदी को कभी आगे नहीं बढ़ा पायेंगे| ऐसे में हम कभी भी उनको यह बोलकर नहीं सिखा पाएंगे कि आप अंग्रेजी मत बोलिए और हिंदी बोलिए|

      अगर आप हिंदी को आगे बढ़ाने की बात करते हैं तो आपको यह समझना होगा कि हम अब अंग्रेजी का विरोध करके कभी भी हिंदी को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे क्योंकि आज अंग्रेजी इतनी आगे बढ़ चुकी हैं कि हमारी मजबूरी हो गयी हैं| हमें यह भी नहीं पता कि वेबसाइट, इन्टरनेट आदि को हिंदी में क्या कहते हैं क्योंकि हमारे विद्वानों के पास इतना समय नहीं हैं कि इसका हिंदी शब्द बना सके|

      मैं सामान्यत: टिपण्णी का जवाब नहीं देता लेकिन आज आपने एक सवाल उठाया है जिसका जवाब देना जरूरी था| मुझे अच्छा लगा क्योंकि आपकी इस टिपण्णी के कारण कई दिनों बाद थोड़ा सा मातृभाषा के बारे में सोचने को मजबूर हुआ| रही बात इस साईट चिट्टे की तो मैं सिर्फ आपसे इतना कहना चाहूँगा कि अगर हम अंग्रेजी शब्दों का उपयोग न करते तो शायद आप इस चिट्टे पर कभी नहीं आ पाते|

      धन्यवाद

  • सर्वप्रथम नमस्कार आपके उत्तर के लिए।
    दूसरी बात टिप्पणी होती है टिपण्णी नहीं।
    तीसरी बात मुझे अंग्रेजी भाषा से कोई परहेज़ नहीं है क्योंकि कॉपी राइटर होने के नाते मैं स्वयं इस भाषा का बख़ूबी इस्तेमाल करती हूँ लेकिन मैं समझती हूँ कि जब हम बात हिंदी की करते हैं तो उसमें हिन्दीत्व नज़र आना चाहिए। आपके पास अपने तर्क हैं और मैं उससे इंकार नहीं करती।
    फ़िलहाल आपने एक प्रयास किया है जिसके सफल होने की मैं कामना करती हूँ। साथ ही उम्मीद करती हूँ कि जिस उद्देश्य से आपने इस चिट्ठे अर्थात साइट की शुरूआत की है वह सार्थक हो।
    धन्यवाद

    • जल्दबाजी में टिप्पणी में की गयी टिपण्णी की गलती सुधारने के लिए धन्यवाद| मुझे बहुत ख़ुशी हुई कि आपने मातृभाषा के विषय में चर्चा करने के लिए समय निकाला और आपकी प्रतिक्रिया इस चिट्ठे के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं| हम हैप्पीहिंदी.कॉम पर जिंदगी में सुधार लाने वाले लेखों को लिखने का प्रयास कर रहे हैं जिसकी मूलभाषा हिंदी हैं| हम कोशिश करते हैं कि कम से कम अंग्रेजी शब्दों का उपयोग किया जाए और अब इसके लिए और अधिक प्रयास किया जाएगा| जो आप जानते हैं, वो हम नहीं जानते और जो हम जानते हैं, वो आप नहीं| इसलिए मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ|

      मुझे उम्मीद हैं कि यह चर्चा हिंदी को आगे बढ़ाने में सहायक होगी|

      धन्यवाद