The Secret of Life in Hindi – जीवन का रहस्य

एक अपराधी, अपराध क्यों करता है?? उसका अपराध करने का उद्देश्य क्या होता है??

एक संत, सेवा क्यों करता है ?? उसका सेवा करने का उद्देश्य क्या होता है ??

मैं यह ब्लॉग क्यों लिख रहा हूँ?? मेरा ब्लॉग लिखने का उद्देश्य क्या है??

आप यह ब्लॉग क्यों पढ़ रहें है?? आपका यह ब्लॉग पढ़ने का उद्देश्य क्या है??

 

एक अपराधी, एक संत, मैं, आप या इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति जो कुछ भी करता है उसका अंतिम उद्देश्य होता है – ख़ुशी| हर कोई व्यक्ति हमेशा, खुश रहना चाहता है|

एक चोर, चोरी करता है क्योंकि उसे लगता है कि उसे इससे पैसे मिलेंगे जिससे उसे ख़ुशी मिलेगी|

एक संत, दूसरों की भलाई के लिए अपना पूरा जीवन लगा देता है, क्योंकि उसे लगता है की उसे इससे ख़ुशी मिलेगी|

आप आज यह ब्लॉग पढ़ रहे है क्योंकि आपको लगता है कि इससे आपका जीवन बेहतर होगा और आप और अधिक खुश रहेंगे|

एक संत और एक अपराधी दोनों खुश रहना चाहते है, लेकिन दोनों के रास्ते अलग-अलग क्यों??

 

The Secret of Life in Hindi  

क्या आप जानते है, हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा रहस्य क्या है – What is the Secret of our life??

हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि “हम खुद को ही नहीं जानते”, शायद हम अपनी प्रकृति या मूल स्वभाव को ही नहीं जानते या फिर शायद जानते हुए भी अनजान है|

जिस तरह हमें पता है कि पानी का स्वभाव तरल होता है, उसी तरह क्या हमें पता है कि मनुष्य का मूल स्वभाव क्या है??

Self Realization alone image

क्या है हमारा मूल स्वभाव – Self Realization

हर व्यक्ति के अन्दर एक शांत शक्ति मौजूद है जिसे हम अपनी अंतरआत्मा कहते है| यह अंतरात्मा हर परिस्थति में सही होती है| यह अंतरात्मा हमेशा हमें सही रास्ता दिखाती है|

जब भी हम कुछ गलत कर रहे होते है, तब हमें बड़ा अजीब सा लगता है जैसे कोई यह कह रहा कि वह कार्य मत करो| यह हमारे अन्दर मौजूद आतंरिक शक्ति ही होती है जो हमें बुरा कार्य करने से रोकती है|

कहा जाता है कि हर मनुष्य के अन्दर ईश्वर का अंश होता है, यह ईश्वर का अंश हमारी अंतरआत्मा ही होती है|

हमारी प्रकृति या स्वभाव – शांत, शक्ति, प्रेम, निडर, सद्भाव, दूसरों की सहायता और अच्छाई है|

हर मनुष्य के अन्दर यह शांत और अद्भुत शक्ति मौजूद है, चाहे वह एक अपराधी हो या संत या और कोई व्यक्ति|

लेकिन फिर क्यों एक संत सही मार्ग पर चलता है और अपराधी गलत मार्ग पर ???

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि संत को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनाई देती है लेकिन अपराधी को वह आवाज अब सुनाई नही देती|

दरअसल जब हम अपनी अंतरात्मा की आवाज को अनसुना कर देते है तो हमारा अपनी अंतरात्मा से संपर्क कमजोर हो जाता है|

जब हम दूसरी बार कुछ बुरा करने जा रहे होते है तो हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज फिर महसूस होती है लेकिन इस बार वह आवाज इतनी मजबूत नहीं होती क्योंकि हमारा अपनी अंतरात्मा से संपर्क कमजोर हो चुका होता है|

जैसे जैसे हम अपनी अंतरात्मा की आवाज को अनसुना करते जाते है वैसे वैसे हमारा अपनी अंतरात्मा के साथ संपर्क कमजोर होता जाता है और एक दिन ऐसा आता है कि हमें वो आवाज बिल्कुल नहीं सुनाई देती|

जैसे जैसे हमारा अपनी अंतरात्मा के साथ संपर्क कमजोर होता जाता है वैसे वैसे हम उदास रहने लगते है और खुशियाँ भौतिक वस्तुओं में ढूंढने लगते है| हम समस्याओं को हल करने में असक्षम हो जाते है जिससे “तनाव” हमारा हमसफ़र बन जाता है|

 

हम कहाँ जा रहे है ??

आज हमारी जिंदगी एक मशीन की तरह हो गई है जिसमें हम भागते रहते है, लेकिन हमें यह नहीं पता कि हमें जाना कहाँ है?? अगर हम स्वंय को पैसा इकठ्ठा करने वाला रोबोट कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी|

आज हमारे पास सब कुछ है, फिर भी ज्यादातर लोग खुश नहीं है??

ऐसा क्यों है??

इसका सीधा कारण है कि हमारा अपनी अंतरात्मा से संपर्क कमजोर हो गया है, इसलिए हम केवल बाहरी वस्तुओं में ख़ुशी ढूंढते है|

हमें लगता है कि क्रोध होना स्वाभाविक है| लेकिन क्या एक क्रोधी व्यक्ति खुश हो सकता है?? गुस्सा आने के बाद हमारा पूरा दिन या दो तीन घंटे तो ख़राब हो ही जाते है| ऐसा क्यों??

क्योंकि हमारा स्वभाव शांत रहने का है इसलिए जब हम क्रोध करते है, तो हम अपनी अंतरात्मा कि आवाज को अनसुना करते है|

दरअसल हम जितना अपनी अंतरात्मा की आवाज को अनसुना करते जाते है, उतना हम मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर होते जाते है|

हमारा स्वभाव बिल्कुल पवित्र है यानि क्रोध, ईष्या और लालच का कोई स्थान नहीं है| लेकिन जब हम क्रोध, लालच और ईष्या को अपना स्वभाव बनाने की कोशिश करने लगते है तो हम दुखी हो जाते है|

एक चोर को भले ही यह लगता है कि वह चोरी करके खुश हो जाएगा, लेकिन वास्तव में वह चोरी करके अपनी समस्याओं को बढ़ाता है|

जब हम किसी दूसरे व्यक्ति की बुराई करते है, तब हम सबसे अधिक स्वयं को नुकसान पहुंचाते है क्योंकि हमने अपनी अंतरात्मा की आवाज नहीं सुनी|

गौतम बुद्ध ने एक बहुत अच्छी बात कही है –

“त्तुम्हे अपने क्रोध के लिए सजा नहीं मिलती बल्कि तुम्हे अपने क्रोध से ही सजा मिलती है|”

ज्यादातर लोगों को लगता है कि अगर हम क्रोध, ईष्या या लालच करेंगे तो हमें ईश्वर सजा देंगे, लेकिन ऐसा नहीं है| दरअसल जब हम क्रोध, ईष्या, लालच या और कुछ भी बुरा करते है तो हमारा अंतरात्मा से संपर्क कमजोर हो जाते है और यही हमारी सजा होती है|

हम अपने दुखों और समस्याओं के लिए स्वंय जिम्मेदार होते है| मनुष्य का खुश रहना इस बात पर निर्भर करता है कि उसका अपनी अंतरात्मा के साथ संपर्क कितना मजबूत है| अंतरात्मा की आवाज को अनसुना करके हम अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारते है|

82 thoughts on “The Secret of Life in Hindi – जीवन का रहस्य

  1. जीवन का रहस्य : वास्तव में आपने कमाल का लेख में लिखा है ,कास !इन्सान इसे समझ जाय तो ये दुनियां बदल जाय ,
    आत्मा के रूप में परमात्मा हरेक के अन्दर विराजमान है जो हमारा मार्ग दर्शन करता ही रहता है ,जो उनकी बात मानता है वह संत जो नहीं मानता वह असंत ,बस यही जीवन का सार है !!!!

    • धन्यवाद बृज मोहन जी | आपका कमेंट हमें और अधिक अच्छे लेख लिखने के लिए प्रेरित करेगा

  2. agar hm man ko shan’t karke dhyan me magn ho jaye to hmare andar ki aatma prmatma she jur jati h . shatya ki rah dikh jata h . thanks for story

  3. Thanks for uploading such thing.Today I’ve known many thing one thing has impressed me that what is happy or sad.

  4. जीवन का रहसय बताकर आपने हमे सही व गलत का अनतर समझने मे हमारी सहायता की है साधुवाद

  5. बहुत ही बढिया ब्लाॅग है…जीवन बदलने वाला…धन्यवाद.

  6. Mujhe aaj aisa laga ki ek bahut bada diya jal raha hai aur main uske niche khada hoker roshni ka intejar karr raha hoon.

  7. dear sir

    mujhe bahut achha laga sir aur mai mahsoosh bhi kar raha hoo agar ish likhe huye motivtionl words per log chalega toh koi unsuccess full nahi rahega
    lekin log aisa karte nahi hai logo ko bakwash samajh me motivationl life ka sabse bada importet chij hai
    ok
    sir thank you very monch

  8. aap jo bhi hain. aapko thanks. main kai dino se jeena bhul gya tha…. khusi kya hoti hai yeh main bhul gya tha lekin aaj aapki yeh baatein mujhe samjha chuka hai ki main insaan hu koi robot nahi…. ar maine fir se khud ko mehsus karna suru kar diya ar apne andar ki aawaz ko sunna suru kar diya.. aapki yeh sab baatein sun kar mujhe achanak se “sandeep maheshwari sir” ka yaad aa gya.. jo sabko jeena sikhate hain. thanks u verry much sir.

  9. aap jo bhi hain.. great hain. aapne to ‘sandeep maheshwari’ sir ki yaad dila diye sir. thanks u so much.

    sir main sach kahu to yeh sab padh kar mujhe mehsus hua ki main ek insaan hu koi robot nahi.. main kai dino se khus rehne ke liye kisi wajah ki talaas kar rha tha jo mujhe aaj mil gya.. aaj main samjh gya ki mere andar jo feelings aati hai wahi mere khusi ki wajah hai.. bas apne feelings ko samjhna hai aur apne khawahison ko pura karna hai.

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  11. आपने कहा है कि लोग कहते है कि पाप या गलत काम करने से भगवान् रूठ जाते है। हम यह तभी करते है जब हम अपनी अंतरात्मा की आवाज नही सुनते है वह अंतरात्मा की आवाज ही भगवान् है ईश्वर है ।इस आवाज को जब हम नही सुनते तो सजा देती है यानी भगवान् सजा देते है; फिर आपने यह क्यों कहा कि भगवान् हमे सजा नही देता बल्कि हमारी अंतरात्मा सजा देती है ।सत्य यह है कि ये आवाज ही ईश्वर है ।

  12. आपने जीवन का रहस्य के बारे में जो रोचक ज्ञान दिया इसके लिए मैं आपका आभारी हूं इसे मैं अपने जीवन मे उतारने का अथक प्रयास करूंगा और जीवन को सरल तरीके से जियूँगा । धन्यावाद,

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