मौत से लड़कर बने मैराथन धावक – Major D. P. Singh Indian Blade Runner Motivational Story

15 जुलाई 1999, भारत पाकिस्तान कारगिल युद्ध

हिमालय के युद्ध क्षेत्र में मेजर देवेन्द्र पाल सिंह (Major Devender Pal Singh) दुश्मनों से लड़ते हुए बुरी तरह से घायल हो चुके थे| एक तोप का गोला उनके नजदीक आ फटा| उन्हें नजदीकी फौजी चिकित्सालय लाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया|

लेकिन 25 वर्ष का वो नौजवान सैनिक मरने को तैयार नहीं था |

जब उन्हें नजदीकी मुर्दाघर ले जाया गया, तो एक अन्य चिकित्सक ने देखा कि अभी तक उनकी साँसे चल रही है| मोर्टार बम्ब के इतने नजदीक से फटने के बाद किसी भी सामान्य व्यक्ति का बचना नामुनकिन होता है, लेकिन देवेन्द्र पाल सिंह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं थे| वे मौत से लड़ने को तैयार थे|

लहूलुहान देवेन्द्रपाल सिंह की अंतड़िया खुली हुई थी| चिकित्सको के पास कुछ अंतड़िया काटने के अलावा कोई चारा नही था| उन्हें बचाने के लिए उनका एक पैर भी काटना पड़ा, लेकिन किसी भी कीमत पर मेजर मरने को तैयार नही थे |

मेजर ने इस हादसे में न केवल अपना एक पैर खोया बल्कि वे कई तरह की शारीरिक चोटों और समस्याओं से घिर चुके थे – उनकी सुनने की क्षमता कम हो चुकी थी, उनके पेट का कई बार ऑपरेशन हुआ|

आज इतने वर्षों बाद भी बम के 40 टुकड़े उनके शरीर के अलग अलग भागों में मौजूद है जिसे निकाला नहीं जा सका|

देवेन्द्र कहतें है –

“वास्तविकता को समझना और उस पर पार पाना बहुत लोगों के लिए कठिन होता है} लेकिन मैं और मेरे साथी जो घायल हुए थे, हमारे लिए ये गौरव की बात थी| क्योंकि हम हमारे देश की रक्षा करते वक्त घायल हुए थे |

 

मेजर की इच्छाशक्ति और मजबूत इरादों से उनकी जान तो बच गई लेकिन उन्हें अब एक नया जीवन जीना सीखना था |

उन्होंने निश्चय किया की अब वे अपनी अपंगता के बारे में और नही सोचेंगे| उन्होंने अपनी इस कमजोरी एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया|

वे एक वर्ष तक चिकित्सालय में रहे, किसी को भी विश्वास नही था कि वे अब कभी चल भी पाएंगे, लेकिन देवेन्द्र कुछ को अपंगता की जिंदगी स्वीकार नहीं थी| उन्होंने निश्चय किया कि –

“वे न केवल चलेंगे  बल्कि दौड़ेंगे|”

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने बैशाखी के सहारे चलना शुरू कर दिया| कुछ समय बाद उनके कृत्रिम पैर लगा दिया गया| लेकिन कृत्रिम पैरों के साथ चलना इतना आसान नहीं था, देवेन्द्र को हर दिन भयानक दर्द सहना पड़ता था|

physically abeled devender pal sinh

जब वे गिरे तो एक नए उत्साह के साथ उठ खड़े हुए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी|

देवेन्द्र हर रोज सुबह 3 बजे उठ जाते थे और अपनी प्रैक्टिस शुरू कर देते| कुछ महीनों की प्रैक्टिस के बाद देवेन्द्रपाल पांच किलोमीटर तक चलने लग गए| कुछ समय बाद उनकी मेहनत रंग लाई और वे अपने कृत्रिम पैर से मैराथन में दौड़ने लगे|

फिर उन्हें साउथ अफ्रीका से फाइबर ब्लेड से बने अच्छे कृत्रिम पैरों के बारे में जानकारी मिली जो अधिक लचीले और दौड़ने के लिए बेहतर थे|

इस तरह धीरे-धीरे उनकी दौड़ने की गति बढ़ती गई और उन्होंने अपनी विकलांगता को हरा दिया|

17 वर्ष बाद आज देवेन्द्र भारत के एक सफल ब्लेड रनर है और उनके नाम 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड (World Records) है| देवेन्द्र कई मैराथन दौड़ों में हिस्सा ले चुके है और आज भी वे थकते नहीं|

blade runner devendra pal singh

42 वर्षीय देवेन्द्र ब्लेड रनर होने के साथ साथ एक सफल प्रेरक वक्ता (Motivational Speaker) भी है| वे अपने जैसे लोगों को प्रेरित करने के लिए The Challenging Ones. नाम से एक ग्रुप भी चलाते है|

मुझ जैसे लोगों को “Physically Challenged”(विकलांग” या “कमजोर”) कहकर संबोधित किया जाता है लेकिन मुझे लगता है कि हम “Challenger(चैलेंजर)” है     

मेजर देवेन्द्र पाल सिंह 

देवेन्द्रपाल सिंह जैसे लोग इस देश के सच्चे हीरो है और हम उन्हें सलाम करते हैं| 

 

7 Comments

  1. RAM PRATAP VERMA September 7, 2016
  2. Adhiraj October 23, 2016
  3. परितोष करंंजे January 2, 2017
  4. Achhipost January 23, 2017
  5. Govind February 4, 2017
  6. Kushwaha plus February 8, 2017
  7. Ankur Rathi April 8, 2017

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