चाणक्य नीति सारांश : Chanakya Niti

एक अद्भुत ग्रन्थ : चाणक्य नीति (Chanakya Niti)

भारत देश को विश्व गुरु इसीलिए ही कहा जाता था क्योंकि इस देश में चाणक्य जैसे महान व्यक्ति पैदा हुए| लगभग 2 हजार वर्ष पूर्व लिखी गयी चाणक्य नीति को पढ़कर हर कोई आश्चर्यचकित हो जाता है कि इतने वर्षों पूर्व लिखी गए शब्द आज भी उतने ही प्रासंगिक है|

चाणक्य नीति हमारे लिए एक अद्भुत उपहार है| चाणक्य नीति एक जीवन दर्शन है जो यह बताती है कि मनुष्य को जीवन में क्या करना चाहिए और क्या नहीं|

 

 चाणक्य नीति सारांश : Chanakya Niti

 

  • व्यक्ति अकेला पैदा होता है और अकेला मर जाता है| वो अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है और अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • संसार में न कोई तुम्हारा मित्र है न शत्रु | तुम्हारा अपना विचार ही, इसके लिए उत्तरदायी है |

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • भगवान मूर्तियों में नहीं है| आपकी अनुभूति आपका ईश्वर है|आत्मा आपका मंदिर है|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • जैसे ही भय आपके करीब आये, उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिये|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • हमें भूत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, ना ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए| विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है, लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है,और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • कोई काम शुरू करने से पहले, स्वंय से तीन प्रश्न कीजिये – मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होऊंगा| और जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, तभी आगे बढें|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • संसार एक कड़वा वृक्ष है, इसके दो फल ही अमृत जैसे मीठे होते हैं – एक मधुर वाणी और दूसरी सज्जनों की संगति।

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • परिश्रम वह चाबी है,जो किस्मत का दरवाजा खोल देती है |

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • एक बार काम शुरू कर लें तो असफलता का डर नहीं रखें और न ही काम को छोड़ें। निष्ठा से काम करने वाले ही सबसे सुखी हैं।

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • जब तक आपका शरीर स्वस्थ्य और नियंत्रण में है और मृत्यु दूर है, अपनी आत्मा को बचाने कि कोशिश कीजिये| जब मृत्यु सर पर आजायेगी तब आप क्या कर पाएंगे?

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • कोई व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है, अपने जन्म से नहीं|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • जिस प्रकार एक सूखे पेड़ को अगर आग लगा दी जाये तो वह पूरा जंगल जला देता है, उसी प्रकार एक पापी पुत्र पुरे परिवार को बर्वाद कर देता है|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • सबसे बड़ा गुरु मन्त्र है :- कभी भी अपने राज़ दूसरों को मत बताएं, ये आपको बर्वाद कर देगा|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में फैलती है| लेकिन एक व्यक्ति की अच्छाई हर दिशा में फैलती है|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है| ऐसी कोई मित्रता नहीं जिसमे स्वार्थ ना हो, यह कड़वा सच है|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • अपमानित होके जीने से अच्छा मरना है| मृत्यु तो बस एक क्षण का दुःख देती है, लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • जब आप किसी काम की शुरुआत करें , तो असफलता से मत डरें और उस काम को ना छोड़ें| जो लोग इमानदारी से काम करते हैं वो सबसे प्रसन्न होते हैं|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • एक उत्कृष्ट बात जो शेर से सीखी जा सकती है वो ये है कि व्यक्ति जो कुछ भी करना चाहता है उसे पूरे दिल और ज़ोरदार प्रयास के साथ करे|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • सारस की तरह एक बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए और अपने उद्देश्य को स्थान की जानकारी, समय और योग्यता के अनुसार प्राप्त करना चाहिए|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • जो लोग परमात्मा तक पहुंचना चाहते हैं उन्हें वाणी, मन, इन्द्रियों की पवित्रता और एक दयालु ह्रदय की आवश्यकता होती है|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • किसी कार्य को कभी भी कल पर नहीं छोड़ना चाहिए| अगले पल क्या हो जाए, कौन जानता है |

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • मनुष्य के चेहरे पर जो भाव उसकी आँखों के द्वारा प्रकट होते हैं, वे उसके मन की अनुकृति होते हैं| उन्हें देवता भी नहीं छुपा सकते|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • अपने कार्य की शीघ्र सिद्धि चाहने वाला व्यक्ति नक्षत्रों की प्रतीक्षा नहीं करता|

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • दुर्जन और सर्प के सामने आने पर सर्प का वरण करना उचित है, न कि दुर्जन का, क्योंकि सर्प तो एक बार डसता है, परंतु दुर्जन व्यक्ति कदम कदम पर बार बार डसता है ।

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • जो तुम्हारी बात सुनते हुए इधर-उधर देखे, उस पर कभी विश्वास न करो ।

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

  • भाग्य उनका साथ देता है जो हर संकट का सामना करके भी अपने लक्ष्य के प्रति दृढ रहते है ।

Chanakya Niti – चाणक्य नीति

 

12 Comments

  1. ravi October 30, 2015
  2. pervesh singh November 29, 2015
  3. Ravindra singh Rajpurohit February 10, 2016
  4. dhannaram February 22, 2016
  5. PRADEEP June 1, 2016
  6. vikas gautam June 5, 2016
  7. akshay kr yadav July 21, 2016
  8. sachin September 23, 2016
  9. Dr. Mamta September 26, 2016
  10. SARITA October 5, 2016
  11. Narendra kumhar October 10, 2016
  12. mahesh pandit January 21, 2017

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